अपनी धुरी से खिसक रही धरती, दूरगामी असर होने के मिल रहे संकेत

अध्ययन में हुआ खुलासा, जमीन से पानी निकालना बन रहा वजह

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नई दिल्ली। हाल के कुछ दशकों में वैज्ञानिक कई बदलाव देख रहे हैं जिसमें उत्तरी ध्रुव का जगह बदलना, पृथ्वी की घूमने की गति में बदलाव होना शामिल है। अब एक नए अध्ययन ने पाया गया है कि पृथ्वी अपनी जिस धुरी पर घूम रही है, अब उसमें भी बदलाव हो रहा है, उन्होंने पाया है कि इस धुरी का झुकाव बदल रहा है और यह अब 31.5 इंच तक पहुंच चुका है। इस अध्ययन के मुताबिक इसकी वजह है मानवीय गतिविधियां और जमीन के अंदर के पानी को बहुत ज्यादा मात्रा में निकालना है, लेकिन नतीजे बता रहे हैं इसका संबंध भारत से भी हो सकता है।
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि जमीन के अंदर पानी बहुत ज्यादा निकालने की वजह से धरती के घूर्णन का ध्रुव अपनी जगह बदल रहा है यानी ध्रुव के बिंदु खिसक रहे हैं। यह इंसान के कारनामों का कुदरत पर बुरे असर की मिसाल है। इस वजह में भारत की भी एक खास भूमिका दिख रही है। शोध से पता चलता है कि 1993 से 2010 के बीच जमीन के पानी की कमी के कारण धरती का ध्रुव करीब 80 सेंटीमीटर पूर्व की ओर खिसक गया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अध्ययन अवधि के दौरान इंसानों ने करीब 2,150 गीगाटन जमीनी पानी बाहर निकाला है।
हकीकत ये है कि धरती की इस धुरी में बदलाव की असल वजह समुद्री जल स्तर में इजाफा है। जो करीब 0.24 इंच बढ़ा है और इससे धरती पर भार का वितरण गड़बड़ा गया है। यही कारण है कि घूर्णन का ध्रुव यानी धुरी हर साल 4.36 की दर से खिसक रहा है। किसी ग्रह के घूमने की धुरी आदर्श रूप में उसकी सूर्य के परिक्रमा की तुलना में सीधे ऊपर से नीचे जाती है, लेकिन पृथ्वी के मामले में अभी तक इस रेखा से उसकी धुरी का कोण करीब 33 डिग्री है, लेकिन पूर्व में इस गणना के लिहाज से जो बिंदु पृथ्वी के घूर्णन का बिंदू था वह अब अपने स्थान से 80 सेमी खिसक गया है।
हालाकि यह कोण के लिहाज से बहुत ज्यादा बदलता हुआ शायद ना दिखे लेकिन दूरी के लिहाज से एक बड़ा बदलाव हो सकता है। अध्ययन में पाया कि इस बदलाव की प्रमुख वजह भारी मात्रा में जमीन के अंदर का पानी निकाला जाना है। गौरतलब है कि इससे पहले वैज्ञानिक इस बदलाव की वजह दुनिया भर में पिघलने वाली बर्फ का बढ़ना मान रहे थे जो कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बहुत तेजी से पिघल रही है यानी जितना नुकसान दुनिया को बर्फ की चादरों के पिघलने से हो रहा है उससे कहीं ज्यादा जमीन के अंदर का पानी महासागरों तक जाने से हो रहा है।
शोधकर्ताओं ने माना है कि पश्चिमी अमेरिका और उत्तर पश्चिमी भारत ऐसे खास इलाके हैं जहां बहुत ज्यादा मात्रा में जमीन से पानी निकाला जा रहा है। ये इलाके पृथ्वी के मध्य अक्षांश में पड़ते हैं ऐसे में इनकी घूर्णन के ध्रुव के खिसकने में प्रभावी भूमिका हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल ये बदलाव मौसमी स्तर पर बदलाव नहीं ला रहा है, लेकिन वे मान रहे हैं कि इसके दूरगामी असर जरूर देखने को मिलेंगे। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नतीजे नीति निर्मातओं और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए एक चेतावनी हैं।

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