नई दिल्ली। भारत का रेल संपर्क भूटान के साथ जोड़ने के लिए साल 2018 से ही दोनों देश बातचीत कर रहे थे। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भूटान दौरे के दौरान दोनों देशों ने इसके लिए आधिकारिक तौर पर समझौता किया। भारत की दो रेलवे लाइन, कोकराझार-गेलेफू और बनारहाट-समत्से बिछाने की योजना है। भूटान के गेलेफू और भारत के असम के कोकराझार को जोड़ने वाले इस 69.04 किलोमीटर लंबे रेलवे लिंक का निर्माण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इस रूट पर ट्रेन का संचालन नार्थ ईस्टर्न फ्रंटियर (एनएफ) रेलवे द्वारा किया जाएगा। इस रेलवे लिंक की बुनियादी ढांचा योजना में दो अहम पुल, 29 बड़े पुल, 65 छोटे पुल, एक ‘रोड ओवर-ब्रिज’, 39 ‘रोड अंडर-ब्रिज’ और 11 मीटर लंबाई के दो पुलों का निर्माण शामिल है। प्रस्तावित रेलवे लाइन प्रधानमंत्री की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘पड़ोसी पहले’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।
भारतीय रेलवे ने असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक रेल लाइन बिछाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी कर ली है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित 69.04 किलोमीटर रेलवे लाइन असम के कोकराझार स्टेशन को भूटान के गेलेफू से जोड़ेगी और इसकी अनुमानित लागत 3,500 करोड़ रुपये होगी। इस रेलवे लाइन के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण पहले ही पूरा हो चुका है। अब डीपीआर की मंजूरी का इंतजार है। इस परियोजना में छह नए स्टेशन–बालाजन, गरुभासा, रुनिखाता, शांतिपुर, दादगिरि और गेलेफू का विकास शामिल है।
प्रस्तावित रेलवे लाइन दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाकर भारत-भूटान संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगी। इससे संपर्क में भी सुधार होगा और भूटान को अपना पहला रेलवे लिंक मिलेगा और निर्बाध परिवहन की सुविधा मिलेगी। असम के लिए तो यह रेल मार्ग संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा। भूटान पर्यटकों के लिए ज्यादा से ज्यादा केंद्र खोलने के लिए बहुत उत्सुक है।
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