नवरात्रि की सप्तमी पर अर्द्धनारिश्वर स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती के बाद दिए दर्शन

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उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में नवरात्रि की चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर, शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन किया और बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से जलाभिषेक किया। प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट, रुद्राक्ष और पुष्पों की माला धारण करवाई गई।
विशेष बात यह रही कि सप्तमी की भस्म आरती में शुक्रवार के संयोग पर बाबा महाकाल का अर्धनारीश्वर स्वरूप में श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक को श्रृंगारित करते हुए फूलों की माला भी धारण करवाई गई। श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भस्म रमाई गई, फिर कपूर आरती कर भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और  जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।

क्यों किया जाता है अर्धनारीश्वर श्रृंगार?
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप अत्यंत भव्य है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव ने यह रूप ब्रह्मा जी के सामने धारण किया था। साधक भगवान शिव और शक्ति को प्रसन्न करने के लिए भोलेनाथ के अर्धनारीश्वर स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। अर्धनारीश्वर स्वरूप का अर्थ है – आधा पुरुष और आधी स्त्री। महादेव का यह रूप पुरुष और स्त्री की समानता को दर्शाता है। अर्धनारीश्वर स्वरूप के आधे हिस्से में पुरुष और आधे हिस्से में स्त्री का वास होता है। इससे यह संकेत मिलता है कि पुरुष और स्त्री एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, शिव और पार्वती दोनों की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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