पूजन में पान का भी इस्तेमाल होता है। 151 पान पूजन के लिए व एक हजार पान अतिथियों को बांटने के लिए वाराणसी से आ रहे हैं। पान के पत्तों के बिना धार्मिक अनुष्ठान पूरे नहीं होते हैं।
पान के अंदर और बाहरी हिस्से में भगवान विष्णु और भगवान शिव वास करते हैं। साथ ही पूजा थाल, लोटा, सिंहासन, पीतल के घंटे, हाथ की घंटी, कुश, छत्र, चंवर, पूजा, डोलची भी काशी से ही आ रही है। माला से लेकर सभी चीजें 15 जनवरी तक अयोध्या पहुंच जाएंगी।