पत्र में आगे कहा गया है कि वर्तमान में दमोह-जबलपुर खंड का मप्र का एमपीआरडसी द्वारा आवश्यक अनुरक्षण ही किया जा रहा है। इसे अगस्त 2024 तक बिना किसी अतिरिक्त देयता के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग को सौंपा जा सकता है। इसलिए शीघ्र ही इस मार्ग को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आधिपत्य में लिया जाना आवश्यक है। जिससे इस मार्ग को फोरलेन बनाया जा सके। हाल ही में संस्कृति मंत्री धर्मेद्र लोधी ने भी इस मार्ग के गड्ढों को भरने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह को पत्र लिखा है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री बसों का आवागमन होता है। जबलपुर के महानगर होने के कारण लोग यहां इलाज कराने और खरीदी करने के लिए भी प्रतिदिन जाते हैं। इसके अलावा नागपुर जाने के लिए भी यह प्रमुख मार्ग है।
पत्र में आगे कहा गया है कि वर्तमान में दमोह-जबलपुर खंड का मप्र का एमपीआरडसी द्वारा आवश्यक अनुरक्षण ही किया जा रहा है। इसे अगस्त 2024 तक बिना किसी अतिरिक्त देयता के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग को सौंपा जा सकता है। इसलिए शीघ्र ही इस मार्ग को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आधिपत्य में लिया जाना आवश्यक है। जिससे इस मार्ग को फोरलेन बनाया जा सके। हाल ही में संस्कृति मंत्री धर्मेद्र लोधी ने भी इस मार्ग के गड्ढों को भरने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह को पत्र लिखा है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री बसों का आवागमन होता है। जबलपुर के महानगर होने के कारण लोग यहां इलाज कराने और खरीदी करने के लिए भी प्रतिदिन जाते हैं। इसके अलावा नागपुर जाने के लिए भी यह प्रमुख मार्ग है।