वक्फ बोर्ड की 500 से ज्यादा जमीनों पर सरकार की सख्ती, अवैध कब्जों की जांच तेज

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इंदौर। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ गई है। इंदौर जिले में लगभग 500 जमीनें वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हैं। इन जमीनों का सही उपयोग हो रहा है या नहीं, इसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अधिकांश अधिकारियों और तहसीलदारों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। जूनी इंदौर तहसील में सबसे अधिक भूमि दर्ज है, जहां 187 जमीनों का रिकॉर्ड मिला है। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर हाल ही में एक बिल पास होने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मध्यप्रदेश के तीन जिलों भोपाल, इंदौर और देवास में कुल 108 वक्फ संपत्तियों का निरीक्षण किया गया है।
जांच में खुलासा: वक्फ बोर्ड की भूमि पर अतिक्रमण और गड़बड़ियां
विभिन्न तहसीलों में वक्फ बोर्ड की जमीनों की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देपालपुर में 136, सांवेर में 105, विचौली हप्सी में 15, महू में 93, हातोद में 38, कनाड़िया में 09, राऊ में 18 और मल्हारगंज में 19 जमीनों की जांच की गई। प्रशासन को कई जगह यह देखने को मिला कि कुछ जमीनें अवैध रूप से नामांतरित की गई हैं, और कई मामलों में निजी भूमि को भी वक्फ बोर्ड के नाम कर दिया गया था। हाल ही में हुए निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कुछ मंदिरों की भूमि को भी वक्फ बोर्ड के खाते में शामिल कर दिया गया है, जिसे अब सुधारा जाएगा।

वक्फ बोर्ड संपत्तियों की निगरानी के लिए बढ़ी सरकारी सख्ती
वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब अधिक सतर्क हो गई है। केंद्र सरकार देशभर में अधिकारियों को नियुक्त कर रही है, जो इन संपत्तियों की स्थिति की पुष्टि करेंगे। भोपाल, इंदौर और देवास जिलों की 108 संपत्तियों की जांच पूरी हो चुकी है। वक्फ संपदा से जुड़े मामलों पर नजर रखने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी मध्यप्रदेश के दौरे पर रहा। इस टीम ने 9 मार्च को वक्फ संपदा एवं संपत्तियों के सर्वेक्षण और ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया का अवलोकन किया था।

अवैध खरीद-फरोख्त और नामांतरण की जांच होगी तेज
लंबे समय से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध खरीद-फरोख्त की खबरें सामने आती रही हैं। कई मामलों में वक्फ बोर्ड के अधिकारियों द्वारा बिना उचित प्रक्रिया के जमीनों का नामांतरण किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में कई जगह यह पाया गया कि निजी भूमि को भी वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज कर दिया गया था। अब प्रशासन इन सभी गड़बड़ियों की समीक्षा कर रहा है, ताकि जिले में सही आंकड़ा सामने आ सके। तहसीलदार और पटवारी इन संपत्तियों की जांच में जुटे हैं और सरकार जल्द ही इन पर बड़ा फैसला ले सकती है।

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