JABALPUR: एमपी की NEET PG मेरिट लिस्ट निरस्त, सामान्यीकृत अंकों के आधार पर प्रोत्साहन अंक देने के आदेश

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जबलपुर। एमडी-एमएस कोर्स में दाखिले के लिए नीट पीजी काउंसलिंग में मध्यप्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट सूची तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने नीट पीजी काउंसलिंग में प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट सूची को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
युगलपीठ ने अपने आदेश में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड को निर्देश किया है कि प्रदेश के इन सर्विस उम्मीदवार की नई सूची तैयार करे। सूची तैयार करने में उम्मीदवारों को उनके रॉक अंक नहीं बल्कि इन्सेन्टिव अंक के आधार पर प्रोत्साहन अंक दिए जाएं। युगलपीठ ने सामान्यीकृत अंकों के आधार पर प्रोत्साहन अंक देकर इसे नए सिरे से तैयार करने के आदेश जारी किए हैं।
रीवा के डॉ. अभिषेक शुक्ला और अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि नीट के नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाते हुए पीजी कोर्स में दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मैरिट लिस्ट तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइज़ेशन प्रोसेस को अपनाया गया है, जिसके कारण नीट के मैरिट लिस्ट में अच्छी रेटिंग होने के बावजूद भी प्रदेश की मेरिट लिस्ट में उनका स्थान नीचे हो गया। याचिकाकर्ताओं की तरफ कहा गया था कि पहले राउंड के लिए चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी, जो 24 नवंबर की रात 12 बजे तक चलेगी, जिसका रिजल्ट 26 नवंबर को घोषित किया जाना है। एडमिशन की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हो रहा, पहले राउंड के रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए काउंसलिंग के रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाते हुए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड को अनावेदक बनाए जाने की अनुमति देते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। एनबीईएमएस की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि रैंकिंग सापेक्ष प्रदर्शन के आधार पर दी गई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह समझ के बाहर है कि कैसे और क्यों दो उम्मीदवारों के बीच सापेक्ष प्रदर्शन केवल उन्हें अलग-अलग सूचियों में रखने से बदल सकता है। कैसे एक उम्मीदवार जिसने अखिल भारतीय रैंक सूची में दूसरे उम्मीदवार की तुलना में अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उसी उम्मीदवार की तुलना में राज्य सूची में कम अंक प्राप्त किए हैं।
युगलपीठ ने आदेश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में इन-सर्विस उम्मीदवार की कठिन ग्रामीण परिस्थितियों में पोस्टिंग है और वह अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। सेवा की अवधि के आधार पर अपने रॉ स्कोर में 10, 20, और 30 प्रतिशत प्रोत्साहन अंक पाने के हकदार हैं। युगलपीठ ने प्रदेश के उम्मीदवारों को मेरिट लिस्ट निरस्त करते हुए सामान्यीकृत अंकों के आधार पर प्रोत्साहन अंक देकर इसे नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संधी ने पैरवी की।
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