नई दिल्ली। हाथ में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियों के साथ अमेरिका ने भारतीयों को भेजा है। ये घटना लज्जानक और चौंकाने वाली थी। अब 11 एवं 12 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी अमिरका जा रहे हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी होना है। पीएम मोदी इस मुद्दे पर ट्रंप से दो टूक कहेंगे कि भारतीयों को वापस भेजना है बेशक भेजिए लेकिन पूरे सम्मान के साथ।
इस मामले पर बजट सत्र के संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। सरकार विपक्ष के सारे सवालों के जवाब दिए, साथ अमेरिका के इस कदम का विरोध किया है। अब लोगों के मन में सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 से 13 फरवरी को अमेरिकी दौरे पर जा रहे हैं, तो क्या वह अमेरिकी राष्ट्रपति के समक्ष इस दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाएंगे। सरकारी सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के समक्ष ऐसे व्यवहार का मुद्दा उठा सकते हैं।
104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के बाद एक सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की कि 96 और सत्यापित भारतीय नागरिक हैं जिन्हें जल्द ही भारत निर्वासित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा उठा सकते हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक होगी। टीओआई से बात करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसके बारे में जानकारी दी। सवाल- क्या भारत ने ब्राजील की तरह अपने नागरिकों के साथ किए गए व्यवहार का आधिकारिक रूप से विरोध किया है? पर जवाब देते उन्होंने कहा, ‘हां, हमने अमेरिका के साथ (दुर्व्यवहार पर) अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं।’ मिसरी ने मीडिया ब्रीफिंग में यह भी कहा, ‘अमृतसर में निर्वासियों को लैंड कराना, पहले की तुलना में “थोड़ा अलग प्रकृति” का था। ट्रंप प्रशासन ने निर्वासन को राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान के रूप में वर्णित किया है। शायद यही एक कारण है कि सैन्य विमान का इस्तेमाल किया गया।
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