नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। जाहिर है कि मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही होगा। लेकिन मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा की जाएगी। प्रधानमंत्री 12-13 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह 15 फरवरी के बाद होने की संभावना है।
इधर सीएम की नियुक्ति एलजी विनय कुमार सक्सेना क्यों नहीं करेंगे तो इस सवाल के जवाब में पार्टी सूत्र बताते हैं कि, केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण दिल्ली को मुख्यमंत्री के नाम पर राष्ट्रपति की मंजूरी जरुरी है। दिल्ली में मुख्यमंत्री की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। हालांकि, दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए यहां के मुख्यमंत्री की नियुक्ति में कुछ विशेष प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।दिल्ली की जनता ने विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत दिया है। इसके साथ ही 10 साल से ज्यादा की आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भाजपा को 48 सीट मिली है। वहीं आप ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की है। अब दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री कौन होंगे इस सवाल के जवाब ढूंढ़े जा रहै हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, एक बार जब पार्टी सीएम के लिए नाम तय कर लेती है, तो राष्ट्रपति मुर्मू, उपराज्यपाल की सलाह पर सीएम की नियुक्ति करेंगे। जिनकी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इस प्रक्रिया में समय (2-3 दिन) लगेगा।
सूत्र ने कहा, इसके अलावा, अन्य भाजपा शासित राज्यों की तरह ही शपथ ग्रहण समारोह में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। यह देखते हुए कि प्रधानमंत्री 12-13 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। शपथ ग्रहण समारोह 15 फरवरी के बाद होने की संभावना है, जब तक कि अगले 1-2 दिनों में सब कुछ तय नहीं हो जाता। जहां तक सीएम के नाम का सवाल है, बीजेपी जाति, अनुभव और राजनीतिक रणनीति के बीच संतुलन बनाते हुए किसी सरप्राइज कैंडिडेट को चुनने की संभावना है।
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