नई दिल्ली। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) और विप्रो जैसी बड़ी कंपनियां ने पाम ऑयल की बढ़ती कीमतों की वजह से साबुन के भाव 7-8 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। पाम ऑयल, साबुन निर्माण में एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है और इस बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव सीधे ग्राहकों की जेबों पर दिख रहा है। सिर्फ साबुन ही नहीं, एचयूएल और अन्य कंपनियां चाय की कीमतों में भी इजाफा कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफे की वजह से कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं। पाम ऑयल, कॉफी, और कोको जैसे कच्चे माल की कीमतों में उछाल का असर देखने को मिल रहा है। विप्रो कंज्यूमर केयर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंडस्ट्री के सभी बड़े ब्रांड्स ने लगभग 7-8 फीसदी की मूल्य वृद्धि की है। विप्रो कंज्यूमर केयर भी साबुन की कीमतों में संशोधन किया है। पाम ऑयल की कीमतें सितंबर से लगभग 35-40 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। इसे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने की संभावना है, खासकर साबुन और चाय के दामों में। एचयूएल और विप्रो जैसी कंपनियां इस बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं की जीवनशैली पर देख रही हैं। इस महंगाई तंत्र से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे दलित वर्ग के लोग, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर है। अब उन्हें और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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