पुणे। पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल ने एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिया। महिला के परिजनों का आरोप है कि 10 लाख रुपये जमा कर पाने में असमर्थता के चलते अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को गलत बताया है। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर नाराजगी जताते हुए इसे अस्पताल की असंवेदनशीलता बताया और जांच के आदेश दिए हैं। सीएम ने जांच के लिए एक जांच समिति गठित की है। दरअसल अस्पताल द्वारा महिला को भर्ती करने से इनकार के बाद परिजन उसे दूसरे अस्पताल लेकर गए, लेकिन जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद महिला की मौत हो गई।
इस मुद्दे पर कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया। जिस महिला की मौत हुई है, उसका पति भाजपा एमएलसी अमित गोरखे का निजी सचिव है। ऐसे में भाजपा एमएलसी ने भी अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी बयान जारी कर कहा कि कि सीएम इस घटना को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने चैरिटी के जॉइंट कमिश्नर की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाने का आदेश दिया है। इस समिति में कानून और न्याय विभाग के डिप्टी सचिव और अंडर सेक्रेटरी भी सदस्य होंगे। साथ ही मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि न्याय विभाग और चैरिटी कमिश्नर ये सुनिश्चित करें कि चैरिटी मरीज योजना को उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सभी चैरिटी अस्पतालों के लिए तैयार किया जाए।
सभी चैरिटेबल अस्पतालों को चैरिटी हॉस्पिटल हेल्प डेस्क की मंजूरी जरूर लेनी चाहिए और अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बेड आरक्षित रखे जाएं। सरकार ने चैरिटेबल अस्पतालों में 186 चैरिटेबल हेल्थ वर्कर्स की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। पत्रकारों से बात करते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि गर्भवती महिला को भर्ती करने से इनकार करना अस्पाल की असंवेदनशीलता है।
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