परीक्षा पे चर्चा के छठे एपिसोड में प्रसिद्ध अभिनेता विक्रांत मैसी बच्चों के साथ संवाद करते नजर आए। उन्हें बच्चों को सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बनाए रखने के महत्वपूर्ण उपाय दिए। मैसी ने बताया कि कैसे जर्नलिंग और विज़ुअलाइजेशन जैसी तकनीकों से सफलता की राह आसान हो सकती है। विक्रांत मैसी ने कहा कि आज के समय में छात्रों के पास बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन फिर भी परीक्षा के समय दबाव और तनाव बढ़ जाता है। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनके समय में परीक्षा के दौरान घरों में टीवी केबल तक काट दी जाती थी और माहौल पूरी तरह से पढ़ाई केंद्रित हो जाता था। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे भाग्यशाली हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा पे चर्चा जैसे संवाद कार्यक्रमों से प्रेरणा मिलती है।
मैसी ने बातचीत के दौरान पॉजिटिव माइंडसेट बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि माता-पिता को बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे केवल नंबरों के पीछे न भागें, बल्कि बच्चों की प्राकृतिक क्षमताओं और रुचियों को पहचानें। उन्होंने छात्रों को बताया कि परीक्षा सिर्फ एक पड़ाव है, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास जरूरी है। विक्रांत ने बच्चों को पावर ऑफ विजुअलाइजेशन के महत्व को समझाते हुए एक छोटी सी कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि जब हम कोई कहानी सुनते हैं, तो हर व्यक्ति उसे अलग-अलग तरीके से कल्पना करता है। इसी तरह, जब हम अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से कल्पना करते हैं, तो उसे पाने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे अपने सपनों को स्पष्ट रूप से देखें और उन पर फोकस करें।
इसके अलावा, उन्होंने छात्रों को जर्नलिंग यानी अपनी भावनाओं और विचारों को लिखने की आदत डालने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, अगर आप रोजाना 10 मिनट भी यह सोचकर लिखें कि आपने दिनभर क्या सीखा, क्या अच्छा हुआ, और क्या सुधार करना है, तो यह आपके मानसिक विकास के लिए बहुत उपयोगी होगा। उन्होंने इसे एक तरह का मेनिफेस्टेशन मतलब आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने की प्रक्रिया बताया और कहा कि इससे छात्रों को अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। अंत में, विक्रांत ने छात्रों को परीक्षा के तनाव से बचने के लिए खेल-कूद, ध्यान और संतुलित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता से डरने के बजाय उसे सीखने का अवसर मानना चाहिए। परीक्षा सिर्फ एक पड़ाव है, लेकिन असली सफलता समय प्रबंधन, मेहनत और सकारात्मक सोच से आती है।
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