जबलपुर। जबलपुर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में एक युवक की मौत जाती है, इसकी जानकारी जब मृतक की बीबी और बच्चों को लगती है तो वह मेडिकल अस्पताल पहुंचते हैं जहां पर पता चलता कि मृतक को उसकी मां और भाई लेकर चले गए हैं। बीबी-बच्चे अपने ससुराल पहुंचते हैं तो वहां सास के घर में ताला लगा पाते हैं। पति के शव को पाने के लिए पत्नी और बच्चे पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचते हैं जहां पूरे मामले की जानकारी देकर न्याय की गुहार लगाते हैं। अधारताल कंचनपुर निवासी सुशीला सिंह सोलंकी ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि सरकारी कुंआ हनुमानताल निवासी महेंद्र सिंह सोलंकी के साथ पूरी रीति रिवाज से कुछ साल पहले उसकी शादी हुई थी। उसकी दो बच्चियां है और कुछ समय पूर्व सास और देवर ने उसे घर से बेघरकर दिया। वह अधारताल कंचनपुर में अपने पति के साथ किराये के मकान में रहती थी। पति महेंद्र का कुछ दिन पूर्व एक्सीडेंट हो जाता है। जिसे सास और देवर मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराते हैं, बुधवार को इलाज के दौरान पति की मौत जाती है। इसकी जानकारी जब लगती है तो वह मेडिकल अस्पताल पहुंचते है जहां पहले से मौजूद सास-देवर उसे जाने के लिए बोलते हैं इस पर सास-देवर से पति का शव देने के गुहार लगाई जाती है परंतु दोनों के द्वारा पति का शव नहीं दिया जाता है और एंबुलेंस में शव को लेकर चले जाते हैं।
मृतक की पत्नी का कहना है कि सास – देवर जायजाद में हिस्सा नहीं देना चाहते हैं इसलिए उन्होंने पति के शव का अंतिम
संस्कार करा दिया और इसकी जानकारी तक नहीं दी। पीड़िता महिला का कहना है कि उसकी दो बच्चियां है और पति के दम पर ही पूरा परिवार का भरण-पोषण हो रहा था। अब पति की मौत हो जाने पर उसकी संपत्ति में कानूनी रूप से उसका और बच्चों का हक बनता है।